हिमालय संवाद / नारायणबगड़/थराली (चमोली) डेस्क । थराली विकास खंड थराली के अंतर्गत लगभग पांच हजार से अधिक की जनसंख्या की आबादी वाले क्षेत्रों को जोड़ने वाला एकमात्र थराली-सूना-पैनगढ मोटर पुल के पिछले तीन साल पहले प्राणपति गधेरे के बाढ़ में बह जाने के कारण यहां के लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
इस स्थान तीन साल पहले मोटर पुल बह गया था तब स्थानीय लोगों और पीडब्ल्यूडी के द्वारा क्षेत्र के लोगों की आवाजाही के लिए एक लकड़ी का वैकल्पिक पैदल पुल का निर्माण किया गया था लेकिन यह वैकल्पिक पैदल पुलिया भी पिछले पखवाड़े एक बार फिर से प्राणमति गधेरा का जलस्तर बढ़ने के चलते बह गया और कुछ हिस्सा मलवे-पत्थरों में दबा हुआ है।जिस कारण बीच नदी में पुल पर मलवे-पत्थरों का ढेर लगने से उस स्थान पर विद्युत पावर हाउस और लोगों के आने जाने का रास्ता लगातार पानी बढ़ने से लबालब हो गया है।

जिससे अब लोग एकतरफा पैदल आवाजाही भी नहीं कर पा रहे हैं।बताते चलें कि यहां इस स्थान पर पिछले तीन सालों से एक वैली बृज का निर्माण किया जाना है लेकिन पीडब्ल्यूडी की ढुलमुल रवैए के कारण इस बड़ी आबादी क्षेत्र के लोगों को तमाम तरह की दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। इस वैली बृज के समय से निर्मित न होने से जहां छात्र-छात्राओं को हर दिन पठन-पाठन के लिए स्कूलों को आने-जाने में मुश्किलें झेलनी पड़ती है तो वहीं बिमार और प्रसूताओं को अस्पताल लेकर जाना भी बहुत ही चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।जिस कारण लोगों को अतिरिक्त दूरियां तय करके गंतव्यों तक पहुंचना पड़ता है।
अब जबकि मानसून भी अपने चरम पर होगा तो ऐसे में फिलवक्त तो वैली बृज का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता है और ना ही आजकल लकड़ी का पैदल पुलिया ही बनाई जा सकती है। ऐसे में नगर पंचायत के वार्ड चार से सभासद मोहन पंत,प्रेम सिंह बुटोला,दलवीर सिंह पिमोली आदि ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी से गुहार लगाई कि पिछले पखवाड़े जो पैदल लकड़ी का वैकल्पिक पैदल पुल बाढ़ में आधा-अधूरा बह चुका है तथा उसका शेष भाग जो नदी के पानी को रोक रहा है जिससे वहां पर विधुत पावर हाउस और लोगों के आने-जाने वाले पैदल रास्ता की ओर पानी का बहाव बढ़ने से लगातार खतरा बना हुआ है।
लोगों ने मांग की है कि उक्त पैदल पुल के अवशेष भाग को मशीनों के द्वारा नदी से उठाकर सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाए और नदी का पानी का बहाव पावर हाउस और पैदल मार्ग से दूसरी तरफ डायवर्ट किया जाए। सभासद मोहन पंत ने कहा कि पैदल पुल पर जो स्लीपर(लकड़ियां) लगाई गई हैं उनको सुरक्षित स्थान पर रखने की पीडब्ल्यूडी से लगातार संपर्क कर मांग की जा रही थी लेकिन पीडब्ल्यूडी सुनने को तैयार ही नहीं था। इसलिए उन्होंने उपजिलाधिकारी से इसके समाधान की मांग की ।

इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए उपजिलाधिकारी थराली मौके पर पहुंचे और स्थलीय निरीक्षण करने के बाद उन्होंने लोगों की मांग पर तुरंत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट ने बताया कि उन्होंने सभासद एवं अन्य क्षेत्र के लोगों की मांग का संज्ञान लेते हुए पीडब्ल्यूडी को शाम(सोमवार)तक मोके पर मशीनें भेजने और पैदल पुल का शेष भाग को सुरक्षित स्थान पर रखने के साथ-साथ नदी के पानी को डायवर्ट करने के सख्त निर्देश दे दिए हैं।
ताकि बरसात समाप्त होने के उपरांत सुरक्षित रखे गए पुल की सामाग्रियों से दुबारा पुल निर्मित किया जा सके। उन्होंने कहा जल्दी ही फिलहाल इसका समाधान कर दिया जाएगा। इस अवसर पर दीपक रावत, खीमानंद खंडूड़ी,रामू,दीपक बहुगुणा,गिरीश और युवक एवं महिला मंगल दलों के सदस्य भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
रिपोर्ट – सुरेन्द्र धनेत्रा,स्थानीय संपादक




